Kanha TV

दिल के सहरा में कब आलम-ए-तन्हाई है,
जब भी देखा तेरी तस्वीर नजर आई है।

कितना अधूरा सा लगता है जब बादल हो बारिश न हो,
आँखें हो कोई ख्वाब न हो और अपना हो पर पास न हो।

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